मुंगेर का इतिहास

उत्तर में गंगा का किनारा तो दक्षिण में हरे भरे खेती योग्य भूमि एवं जंगल। पूरब में विशाल पहाड़ तो दक्षिण में कलकलाती गंगा का पानी। नदियों, पहाड़ों और हरी भरी हरियाली वाला मैदानी भाग, रबी और खरीफ दोनों प्रकार के फसलों वाला खेतीहर जमीन से प्रकृति ने मानो मुंगेर को गोद लिया हुआ है।
1934 के भूकंप त्रासदी को यदि अफवाद माना जाय तो कभी कोई प्राकृतिक विपदा यहाँ नहीं आई है। यही कारण है की अंग्रेजों ने जब कारखाने लगाने की सोची तो मुंगेर जिले को सबसे सुरक्षित क्षेत्रों में से एक चुना और यहाँ एशिया का सबसे बड़ा भाप इंजन का कारखाना लगाया।
सनातन धर्म में जब भी युग परिवर्तन हुआ उसमें मुंगेर के सांस्कृतिक महत्व का अवश्य उल्लेख है। वैदिक काल के महर्षियों में महर्षि मुद्गल जिनके नाम पर मुद्गलपुरी और कालांतर में मुंगेर नाम पड़ा। सांस्कृतिक रूप से मुंगेर के कई स्थान- ऋषि कुण्ड, शक्ति पीठ चंडिका स्थान, प्रसिद्ध स्थल सीता कुण्ड, माता सीताचरण का मंदिर, कर्ण चौड़ा, हिरन्य पर्वत जो अब पीर पहाड़ के नाम से जाना जाता है इसके जीवंत दर्शन कराता है।
मध्यकालीन युग में भी मुंगेर ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण रहा है। मीर कासिम का किला, मीर कासिम के बेटे गुलफाम व बेटी गुल का मजार इसकी गवाही देते हैं।
आधुनिक काल में एशिया का प्रसिद्ध जमालपुर रेल कारखाना, ITC(Indian Tobacco Company), विश्व प्रसिद्ध बिहार योग विद्यालय इसके उदहारण है।
अंग्रेजी शासन काल में भी अंग्रेजों की दमन नीति की गवाही देते की कई शहीद स्मारक मिल जाते हैं जिसमें तारापुर अनुमंडल थाने में बना स्मारक महत्वपूर्ण है।
अंग्रेजी शासन के बाद स्वतंत्र भारत में बने संविधान के पेजों में छापी गई चित्रों को मुंगेर के ही महान चित्रकार नन्दलाल बसु द्वारा उकेरा गया है. बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री श्री कृष्ण सिंह की जन्म स्थली भी मुंगेर है।
जिस प्रकार मुंगेर का इतिहास प्रत्येक काल खंड में स्वर्णिम रहा है वैसे ही प्रकृति ने भी मुंगेर में मानो सबकुछ न्योछावर कर दिया है- गंगा की पावन जलधारा, जमालपुर काली पहाड़ों की ऊँची चोटियाँ, भीम बांध की गर्म जलधारा, हरे भरे मैदानी भाग, खड़गपुर और बंगलवा के घने जंगल इत्यादि।
वर्तमान में भी केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा मुंगेर का विकाश काफी तीव्र गति से किया जा रहा है। ITC का दुग्ध उत्पादन केंद्र, रेल सह सड़क पुल का निर्माण, मुंगेर जिले से गुजरती हुई 4 लेन मार्ग का निर्माण, मुंगेर विश्वविद्यालय की स्थापना, पॉलिटेक्निक कॉलेज की स्थापना प्रमुख है।