मुंगेर- एक परिचय

उत्तर में गंगा का किनारा तो दक्षिण में हरे भरे खेती योग्य भूमि एवं जंगल। पूरब में विशाल पहाड़ तो दक्षिण में कलकलाती गंगा का पानी। नदियों, पहाड़ों और हरी भरी हरियाली वाला मैदानी भाग, रबी और खरीफ दोनों प्रकार के फसलों वाला खेतीहर जमीन से प्रकृति ने मानो मुंगेर को गोद लिया हुआ है।
1934 के भूकंप त्रासदी को यदि अफवाद माना जाय तो कभी कोई प्राकृतिक विपदा यहाँ नहीं आई है। यही कारण है की अंग्रेजों ने जब कारखाने लगाने की सोची तो मुंगेर जिले को सबसे सुरक्षित क्षेत्रों में से एक चुना और यहाँ एशिया का सबसे बड़ा भाप इंजन का कारखाना लगाया।
सनातन धर्म में जब भी युग परिवर्तन हुआ उसमें मुंगेर के सांस्कृतिक महत्व का अवश्य उल्लेख है। वैदिक काल के महर्षियों में महर्षि मुद्गल जिनके नाम पर मुद्गलपुरी और कालांतर में मुंगेर नाम पड़ा। सांस्कृतिक रूप से मुंगेर के कई स्थान- ऋषि कुण्ड, शक्ति पीठ चंडिका स्थान, प्रसिद्ध स्थल सीता कुण्ड, माता सीताचरण का मंदिर, कर्ण चौड़ा, हिरन्य पर्वत जो अब पीर पहाड़ के नाम से जाना जाता है इसके जीवंत दर्शन कराता है।
मध्यकालीन युग में भी मुंगेर ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण रहा है। मीर कासिम का किला, मीर कासिम के बेटे गुलफाम व बेटी गुल का मजार इसकी गवाही देते हैं।


मुंगेर जिले की स्थापना

3 दिसम्बर 1832 को भागलपुर जिले से अलग करके बनाया गया है। मुंगेर जिला के साथ साथ प्रमंडल भी है। इसके अंतर्गत जमुई, खगड़िया, मुंगेर, लखीसराय, बेगूसराय और शेखपुरा जिले आते हैं। हर वर्ष 3 दिसंबर से 5 दिसम्बर तक जिला प्रशासन के द्वारा मुंगेर महोत्सव का आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर कई सांस्कृतिक एवं खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है, जिसमें स्थनीय एवं अन्तराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकार भाग लेते हैं।
मुंगेर जिले का भौगोलिक क्षेत्रफल 1419.7 वर्ग कि० मी० है. इसकी जनसँख्या 2011 की जनगणना के अनुसार 13 लाख 67 हजार 765 है. जिले में 3 अनुमंडल, 9 प्रखंड, 101 पंचायत, 861 गाँव, 2 नगर निगम, 1 नगर पंचायत हैं। एक समय मुंगेर सबसे बड़ा जिला होता था। लेकिन इससे काटकर 1976 में बेगूसराय, 1988 में खगड़िया और 1991 में जमुई जिला का निर्माण किया गया।


मुंगेर शहरी क्षेत्र

मुंगेर जिले के शहरी क्षेत्र की आबादी लगभग 3,17,847 है. जिले में मुख्य बाज़ार मुंगेर नगर, जमालपुर, बरियारपुर, खड़गपुर, असरगंज, तारापुर, संग्रामपुर, धरहरा, हेमजापुर और नौवागढ़ी है.

मुंगेर शहर का मुख्य बाज़ार पश्चिम में किला से शुरू होकर 1 न० ट्रैफिक(पटेल चौक) पूर्व में DAV School तक और उत्तर के 2 न० गुमटी से दक्षिण में कोणार्क रोड तक है।
मुंगेर शहर को चौक चौराहों का शहर भी कहा जाता है क्योंकि 1934 के भूकंप त्रासदी के बाद इस शहर का नक्शा कुछ इस प्रकार बना की एक चौक पर कई ओर से पहुंचा जा सकता है या जाया जा सकता है। वीर कुंवर सिंह चौक, डॉ अंबेडकर चौक, पटेल चौक, राजीव गाँधी चौक, पंडित दीन दयाल चौक, गाँधी चौक, डॉ राजेन्द्र प्रसाद चौक(जुबली वेल), वीर शिवाजी चौक, विजय चौक, मृगिया चौक, लाल बहादुर शास्त्री चौक, अटल चौक, इंदिरा गाँधी चौक, अब्दुल हामिद चौक, कौडा मैदान चौक, आजाद चौक, भगत सिंह चौक प्रमुख हैं।


मुंगेर के पर्यटन स्थल

Map of Munger Urban Tourist Places

मुंगेर पर्यटन के दृष्टिकोण से बिहार का एक प्रमुख जिला है। मुंगेर में कई पौराणिक एवं ऐतिहासिक स्थल हैं। साथ ही प्रकृति की अनुपम भेंट के रूप में भीम बांध जहाँ गर्म पानी की अविरल धारा पर्यटकों को खास आकर्षित करता है। मुंगेर में अन्तराष्ट्रीय योग विश्वविद्यालय होने के कारण विदेशी पर्यटक भी खूब आते हैं। यहाँ की माँ चंडिका माता की महिमा अपरम्पार है। दूर दूर से श्रद्धालु मन्नत मांगने एवं पूर्ति होने पर पूजा करने आते हैं। मुंगेर शहर के शादीपुर में स्थित बड़ी दुर्गा महारानी की महिमा और ख्याति दूर दूर तक फैली हुई है। हर वर्ष इनकी विशर्जन में निकली शोभा यात्रा लोगों को काफी आकर्षित करती है लाखों की भीड़ से गुजरती हुई माता की प्रतिमा लोगों की ऑंखें नम कर देती है।

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मुंगेर- प्रशासनिक तंत्र

मुंगेर समाहरणालय

मुंगेर के फोर्ट एरिया में लगभग सभी प्रशासनिक अधिकरियों का कार्यालय है. मुंगेर प्रमंडल है इसलिये यहाँ आयुक्त एवं पुलिस उप-महानिरीक्षक का कार्यालय है। जिलाधिकारी जिले के सर्वोच्च हैं। उनका कार्यालय भी किला क्षेत्र में ही है. वर्तमान में राजेश मीणा यहाँ के जिलाधिकारी हैं। मुंगेर जिले के अंतर्गत तीन अनुमंडल है – मुंगेर सदर, हवेली खड़गपुर और तारापुर. वर्तमान में मुंगेर सदर के अनुमंडल पदाधिकारी खगेश चन्द्र झा हैं। अनुमंडल पदाधिकारी का कार्यालय भी मुंगेर फोर्ट एरिया में है। मुंगेर में जिला परिषद् कार्यालय भी फोर्ट एरिया में ही अवस्थित है. यहाँ उपविकाश आयुक्त का कार्यालय है।


मुंगेर- शिक्षा

मुंगेर विश्वविद्यालय

मुंगेर में शिक्षा का काफी पुराना इतिहास रहा है। मुंगेर का ऋषिकुण्ड प्रसिद्ध ऋषि श्रृंग का आश्रम हुआ करता था, जहाँ दूर दूर से ऋषि मुनि आकर तपस्या किया करते थे। आज भी यह स्थान पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। जिला मुख्यालय से 20 किमी दूर खड़गपुर प्रखंड में स्थित ऋषिकुंड गर्मजल के लिए प्रसिद्ध है। वर्तमान में बिहार योग विश्वविद्यालय योग की शिक्षा प्राप्त करने के लिये विश्व का एक मात्र केंद्र है, जो मुंगेर के फोर्ट एरिया में अवस्थित है। मुंगेर में राजकीय आईटीआई कॉलेज मुंगेर मुख्यालय से 3 KM पूर्व में अवस्थित है। इसकी स्थापना वर्ष 1969 में हुई थी। इसके अलावा लगभग 30 प्राइवेट आईटीआई कॉलेज जिले में संचालित हैं।


मुंगेर- स्वास्थ्य

मुंगेर सदर अस्पताल

मुंगेर में स्वस्थ्य सेवा के लिये ब्रिटिश काल में बना मुख्य सदर अस्पताल मुख्य रूप से है। इसके अलावा 9 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं, जो विभिन्न प्रखंडों में संचालित हैं।
इसके अलावा कई प्राइवेट अस्पताल व् निजी क्लिनिक हैं जहाँ जाने माने डॉक्टरों के द्वारा बीमारी का इलाज किया जाता है। समर्पण, पुष्कल मेडिकेयर, सेवायन, गोयेनका मातृ सदन, जीवन अवतार हॉस्पिटल नामी हॉस्पिटल हैं।
मुंगेर में होमियोपैथ पद्धति से इलाज करने वाले कई चिकित्सक हैं।यहाँ एक होमियोपैथी कॉलेज भी है जिसका नाम ‘द टेम्पल ऑफ़ हह्नेमन्न होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज’ है. स्वास्थ्य सेवा के लिये मुंगेर में बड़ी बाज़ार रोड में कई डॉक्टर के निजी क्लिनिक, पैथोलॉजी लैब, एक्स-रे सेंटर, अल्ट्रासाउंड सेंटर हैं।


मुंगेर- व्यावसायिक गतिविधियाँ

Munger Chowk Bazar

मुंगेर जिले के अंतर्गत जितने अनुमण्डल व् प्रखंड हैं लगभग सभी स्थानों में व्यावसायिक गतिविधियाँ होती हैं। सिर्फ टेटिया बम्बर प्रखंड में बाज़ार नहीं है।
मुंगेर शहर की व्यावसायिक गतिविधियाँ मुंगेर नगर निगम एवं जमालपुर नगरपालिका क्षेत्र में होती है। मुंगेर के चौक बाज़ार, गुलज़ार पोखर, नीलम रोड, पूरबसराय, बेकापुर, शादीपुर एवं कौडा मैदान मुख्य रूप से सभी प्रकार के व्यावसायिक गतिविधियों का मुख्य स्थान है. यहाँ खुदरा के साथ साथ थोक विक्रेता भी हैं।
जमालपुर में सदर बाज़ार, अवंतिका रोड, स्टेशन रोड, मोहनपुर, केशोपुर, नयागांव, मुंगरौड़ा, अशिकपुर, एवं मुंगेर रोड मुख्य रूप से सभी प्रकार के व्यावसायिक गतिविधियों का मुख्य स्थान है। यहाँ खुदरा के साथ साथ थोक विक्रेता भी हैं।


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